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क्यों गिरा देना चाहती हो

क्यों गिरा देना चाहती हो चाहतों के दीवार को अभी अरमानों की कश्ती निकली है मुकाम को तुम्हें न जाने क्या जलन है उड़ा देना चाहती हो एक बेकसूर का आशियाना

हमारी भावनाएं उनके इरादों के करीब रहती है

हमारी भावनाएं उनके इरादों के करीब रहती है इंतजार है कब उनका इशारा मिले और अरमानों की कश्ती पार हो जाए

तुम्हारे और हमारे रिश्ते पर

तुम्हारे और हमारे रिश्ते पर लोग हजारों सवाल करने लगे हैं सोचता हूं क्या जवाब दूं इस जमाने को तुमने रिश्ते को न टूटने दिया न जुड़ने दिया थोड़े से खामी पर मेरे वफा को भुला दो यह अच्छा नहीं है क्यों गलतफहमी पाल रखे हो यह मेरा प्यार सच्चा है

हिंदी शायरी

इश्क में कोई मिलावट पसंद नहीं करते है जाल बिछाए हुई है मुझे फसाने के लिए आपकी मुस्कान ऐसी है कि हम, हम नहीं रहते खो जाते हैं तुझमें जिंदगी ढूंढने की कोशिश करने लगा हूं दिल को समझाने की कोशिश नाकाम रहती है थोड़ा जिद्दी है मेरा दिल अपनी चाहतों को हासिल करने के बाद ही मानता है