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Showing posts from November, 2019

क्यों गिरा देना चाहती हो

क्यों गिरा देना चाहती हो चाहतों के दीवार को अभी अरमानों की कश्ती निकली है मुकाम को तुम्हें न जाने क्या जलन है उड़ा देना चाहती हो एक बेकसूर का आशियाना

हमारी भावनाएं उनके इरादों के करीब रहती है

हमारी भावनाएं उनके इरादों के करीब रहती है इंतजार है कब उनका इशारा मिले और अरमानों की कश्ती पार हो जाए

तुम्हारे और हमारे रिश्ते पर

तुम्हारे और हमारे रिश्ते पर लोग हजारों सवाल करने लगे हैं सोचता हूं क्या जवाब दूं इस जमाने को तुमने रिश्ते को न टूटने दिया न जुड़ने दिया थोड़े से खामी पर मेरे वफा को भुला दो यह अच्छा नहीं है क्यों गलतफहमी पाल रखे हो यह मेरा प्यार सच्चा है